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ठेकेदार की मनमानी और गुणवत्ता विहीन कार्य से नागदा–कडोदकलॉ–बरमंडल 27 किमी सड़क की समयसीमा खत्म, काम अधूरा; ठेका निरस्त, अपील के कारण निर्माण रुका

धार जिला ब्यूरो गोपाल की रिपोर्ट 9993454360
धार।  जिले में नागदा–कडोदकलॉ–चिराखान–खुटपाला–बरमंडल 27 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना की निर्धारित 550 दिन की समयसीमा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के रोड्स एंड ब्रिजेस विभाग द्वारा लगभग 49.78 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण स्वीकृत किया गया था।उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना का टेंडर 18 जून 2024 को प्रकाशित हुआ था तथा 8 जुलाई 2024 को बिड ओपनिंग की प्रक्रिया पूरी हुई थी। टेंडर की शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य की अवधि 550 दिन निर्धारित की गई थी, जो कार्य प्रारंभ आदेश जारी होने की तिथि से लागू होती है। विभागीय प्रक्रिया के अनुसार वर्क ऑर्डर सामान्यतः बिड ओपनिंग के 15 से 30 दिन के भीतर जारी हो जाता है, इसलिए कार्य अगस्त 2024 के आसपास प्रारंभ माना जा रहा है। इस आधार पर निर्माण कार्य जनवरी 2026 के अंत या फरवरी 2026 की शुरुआत तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन मार्च 2026 तक भी सड़क का लगभग 30 से 40 प्रतिशत ही कार्य पूरा हो पाया है।विभागीय सूत्रों के अनुसार निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर विभाग ने ठेकेदार का ठेका निरस्त (टर्मिनेट) कर दिया है। हालांकि ठेकेदार द्वारा इस कार्रवाई के विरुद्ध अपील दायर किए जाने के कारण फिलहाल निर्माण कार्य पूरी तरह रुका हुआ है। पीडब्ल्यूडी धार की कार्यपालन यंत्री बबीता मालवीय ने बताया कि ठेकेदार को टर्मिनेट किया जा चुका है, लेकिन मामला अपील में होने के कारण फिलहाल विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा सकती।संभागीय स्तर के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने भी ठेका निरस्त किए जाने (टर्मिनेशन) की पुष्टि की, लेकिन परियोजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए जिला कार्यालय से संपर्क करने की बात कही। लोक निर्माण विभाग के भोपाल मुख्यालय से दूरभाष पर संपर्क करने पर वहां से भी कार्रवाई की पुष्टि की गई, हालांकि पूरी जानकारी जिला कार्यालय से प्राप्त करने का सुझाव दिया गया।इधर इस परियोजना में सड़क की गुणवत्ता और पुलिया निर्माण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं दिखाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि 1 मार्च तक सड़क को आवागमन के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। लगातार सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें भी की जाती रही हैं, इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से निर्माण कार्य अधर में लटक गया। कार्य से अधिक भुगतान किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसकी जांच की मांग क्षेत्र में उठने लगी है।स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब यह सड़क कब दोबारा निर्माण के लिए शुरू होगी। यदि मामला लंबा खिंचता है और बरसात का मौसम आ जाता है तो राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार द्वारा नागदा से बरमंडल तक पूरी सड़क को खोद दिया गया है, जिससे मार्ग की स्थिति बेहद खराब हो गई है। सड़क सूखी नदी की तरह बन गई है और लगातार धूल उड़ने से लोगों का चलना भी मुश्किल हो गया है।गौरतलब है कि इसी मार्ग का नवीनीकरण वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत डामरीकरण कर किया गया था, लेकिन नए निर्माण कार्य के दौरान उस डामर को भी उखाड़ दिया गया। इससे मार्ग की स्थिति और खराब हो गई है तथा स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वर्तमान हालात को देखते हुए सड़क निर्माण कार्य के एक से डेढ़ वर्ष तक और प्रभावित रहने की आशंका जताई जा रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है और यह महत्वपूर्ण सड़क मार्ग कब तक पूरी तरह तैयार हो पाता है।
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